सामर्थ्य की धमकी सुनकर रिमझिम की आँखें बड़ी हो गईं और उसने तुरंत खुद को छुड़ाया और वहाँ से जाने लगी। तभी सामर्थ्य ने कहा, "मेरी बात को हवा में मत लेना।" रिमझिम ने एक पल रुक कर उसकी बात सुनी और फिर अपने धड़कते हुए दिल को काबू कर वहाँ से नीचे की तरफ चली गई। सामर्थ्य भी उसके पीछे-पीछे चला गया।
आधी रात का वक्त था, हर कोई अपने-अपने कमरे में सो रहा था। श्रावणी मोक्ष के साथ थी, तभी अचानक से उनके कमरे में धमाका हुआ, जिस पर श्रावणी जोर से चिल्लाई और उठ कर बैठ गई। उसे लगा बम फट गया है। मोक्ष भी उठ कर बैठ गया और उसने तुरंत लैंप को जलाया और अपने सामने देखा। सामने सामर्थ्य, रिमझिम, लव, नजराना, दृश्य और अफसाना थे।







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